Saturday, August 16, 2014

खरके मड़इया के सींक


गीत

- रामरक्षा मिश्र विमल

खरके मड़इया के सींक
रहि रहि टङाला परान।

सूरज सुतल बाड़े रतिया उतान
परसो होई एक पल के बिहान
मन के जवन लागे नीक
ओही प मनई के शान।

खतरा बा लँघला प आपन सिवान
कठवति के गंगा में कउवा नहान
बनि जाला जीवन के लीक
थथमेला मन के उठान।

तिकड़म के बाती से ललसा धुआँय
स्वारथ के लवना से नेहिया फँफाय
अब कइसन गलती का ठीक
जेकर हो जतना उड़ान।

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साभार- भोजपुरिका डॉट कॉम 
खरके मड़इया के सींक 

आइल स्वाइन फ्लू




- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल


खिरिकी दरवाजा सब बंद भइल अब आइल स्वाइन फ्लू
बचिह भइया आफति के आफति अफनाइल स्वाइन फ्लू


का जाने केकरा के कहँवा कहिया पटकनिया दे दी
लूका छीपी के खेला में बा ढुकि आइल स्वाइन फ्लू


मास्क बिकाता कीने के बा जल्दी ना त बिकि जाई
खाना त काल्हो मिल जाई पँजरा आइल स्वाइन फ्लू


कवनो बड़हन महफिल में अङुरी पर लोग गिना जाले
इनफेक्शन के दहशत लेके बाटे आइल स्वाइन फ्लू


तनिको सर्दी खाँसी ना बरदाश करेले लोग कहीं
आपन के अब आन बनावत आगे आइल स्वाइन फ्लू


उग्रवाद आतंकवाद के चरचा पीछे छूट गइल
टीवी पर रोजे गिनवावे आपन खाइल स्वाइन फ्लू


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साभार- भोजपुरिका डॉट कॉम