Saturday, August 16, 2014

खरके मड़इया के सींक


गीत

- रामरक्षा मिश्र विमल

खरके मड़इया के सींक
रहि रहि टङाला परान।

सूरज सुतल बाड़े रतिया उतान
परसो होई एक पल के बिहान
मन के जवन लागे नीक
ओही प मनई के शान।

खतरा बा लँघला प आपन सिवान
कठवति के गंगा में कउवा नहान
बनि जाला जीवन के लीक
थथमेला मन के उठान।

तिकड़म के बाती से ललसा धुआँय
स्वारथ के लवना से नेहिया फँफाय
अब कइसन गलती का ठीक
जेकर हो जतना उड़ान।

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साभार- भोजपुरिका डॉट कॉम 
खरके मड़इया के सींक 

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